आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने सरकार और विपक्ष पर प्रहार करते हुए कहा कि 1932 का खतियान आधारित स्थानीयता नीति के नाम पर जनता को ठगने का काम किया जा रहा है। सरकार प्रखंडवार नियोजन नीति बनाए ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके।

पूर्व सांसद बुधवार को नया मोड़ स्थित बिरसा आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार पहले 1932 का खतियान आधारित स्थानीय नीति और 73% आरक्षण को बकवास और बेकार कहा करती थी। 27 नवंबर 2002 के बाद अब तक 5 बार झारखंड में जेएमएम के सीएम बने, बावजूद इसके दोनों फैसलों को पुनर्स्थापित करने सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं गए। उन्होंने कहा कि सरकार प्रखंडवार नियोजन नीति बनाकर 90 प्रतिशत नियोजन में प्रखंड को प्राथमिकता दें और 10% शहरी क्षेत्रों के लिए, ताकि आदिवासियों और मूलवासियों को रोजगार मिल सके।

उन्होंने कहा कि आबोआ दिशोम आबोआ राज को पुनर्जीवित करने के लिए वैकल्पिक रूप से पांच बिंदुओं पर जोरदार झारखंडी जन आंदोलन का रास्ता अपनाया होगा। कहा कि झारखंडी भाषा, संस्कृति और जातिगत सूची से पहचाना की जाय। साथ ही प्रकृति-पूजक आदिवासियों के सरना धर्म कोड को अविलंब मान्यता दिया जाय। प्रेसवार्ता में सेंगेल केंद्रीय संयोजक सुमित्रा मुर्मू, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष देवनारायण मुर्मू, जिलाध्यक्ष सुखदेव मुर्मू, मूलवासी संयोजक विदेशी महतो, अरुण किस्कू, राखो किस्कू, गुलाबी पवारिया, देवलता टुडू, करमचंद हांसदा, जयराम सोरेन, ठाकुर महतो, भीम मुर्मू, कोमल किस्कू, चंद्र मोहन मार्डी, खिरोधर मुर्मू, कृष्णा किस्कू, सहदेव महतो, खिरोधर महतो, ललित नारायण, भरत महतो, सहदेव महतो आदि लोग मौजूद थे।

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