सिस्टम पर उठा सवाल—-एक अस्पताल में मरीज को भर्ती लेने के लिए नहीं था खाली बेड तो दूसरे अस्पताल में वेंटिलेटर के नहीं थे तकनीशियन उपलब्ध।

सर्पदंश से नौजवान की मौत मां के लिए बहुत दुखदाई रही जो जीवन भर याद रहेगा, इसलिए कि युवक की मौत उस दिन हुई, जिस दिन कोई मां अपनी संतान की लंबी आयु और मंगल कामना के लिए जितिया पर्व रखी हो। घटना सेक्टर नाईन स्थित बसंती मोड़ कूलिंग पॉड नंबर दो की है। विकास कुमार (25) 18 सितंबर को अपने घर में सोया हुआ था। देर रात करीब दो बजे जहरीला सांप ने डस लिया। सर्प दंश के तुरंत बाद परिजन इलाज के लिए युवक को बोकारो जेनरल अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने अस्पताल में बेड खाली न रहने की बात कहकर उसे भर्ती लेने से इंकार कर दिया और प्राथमिक उपचार भी नहीं किया। उसके बाद आनन-फानन में मरीज को बोकारो सदर अस्पताल ले जाया गया। जहां चिकित्सक ने एंटी वेनम का इंजेक्शन और मामूली उपचार कर पुनः बीजीएच ले जाने को कहा। परिजन एक निजी अस्पताल में भी ले गये, पर मरीज की गंभीर स्थिति को देख कर भर्ती नहीं किया गया। परिजन दोबारा बोकारो जेनरल अस्पताल लेकर पहुंच गये। इलाज के लिए भटकते रहने व समय पर सही इलाज न होने से युवक की मौत हो गई।

क्या है मामला :

मृतक के भाई आकाश कुमार रात में अपने भाई को लेकर बोकारो जेनरल अस्पताल पहुंचा। मरीज को भर्ती कराने के लिए परिजन पैसा देने के लिए तैयार थे। चिकित्सकों ने बेड खाली नहीं होने की बात कह भर्ती करने से इंकार कर दिया। वहां से सीधे सदर अस्पताल ले गये। अस्पताल के चिकित्सक डॉ दीपक ने बताया कि मरीज ढाई बजे रात में आया था, मरीज की स्थिति गंभीर थी। सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। मरीज को वेंटिलेटर की जरूर थी, प्राथमिक उपचार के बाद उसे बीजीएच ले जाने को कहा गया।

परिजनों ने किया हंगामा :

मौत के बाद परिजनों ने बीजीएच पहुंच कर मनमानी का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। हंगामें की सूचना पर सेक्टर चार थाना के इंस्पेक्टर पुलिस बल के साथ पहुंच गये। परिजनों ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने, मृतक के आश्रित को मुआवजा व नौकरी देने की मांग करने लगे। सिटी डीएसपी कुलदीप कुमार भी पहुंचे और मामले की जांच कराने, परिजनों को सरकारी सहायता दिए जाने के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ। इधर अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के आरोप को बेबुनियाद बताया है।

दो अस्पताल नहीं बचा सका युवक की जान : मामला जो भी हो परंतु दुःख की बात है कि दो अस्पताल भी युवक की जान नहीं बचा सके। मरीज को सही हालत में पहले बोकारो जेनरल अस्पताल ले आया गया था। मृतक ने खुद चिकित्सक को बताया कि उसे सांप काटा है। अस्पताल में बेड खाली नहीं रहने की बात कहकर उसे भर्ती नहीं लिया गया। वहीं दूसरी ओर सदर अस्पताल में सही इलाज की व्यवस्था नहीं रहने के कारण उपचार करके खानापूर्ति की गयी। मरीज को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। अस्पताल ने भर्ती करके इलाज इसलिए नहीं किया कि वेंटिलेटर का तकनीशियन कोई नहीं है। जबकि अस्पताल में दस बेड का आईसीयू हैं।

तंत्र मंत्र से जिंदा करने का प्रयास:

युवक के मरने के बाद करीब एक घंटे तक तंत्र मंत्र से जिंदा करने का प्रयास किया गया। जब तंत्र मंत्र का कोई उम्मीद नहीं दिखी तो पुलिस ने हस्तक्षेप किया। परिजनों ने मृतक का ईसीजी कराने को कहा। संतुष्टि के लिए पुलिस के कहने पर उसका ईसीजी करवाया गया। जानकारी के मुताबिक परिजन शव का पोस्टमार्टम कराने के बजाय अपने घर लेकर चले गए।

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