आनंद मार्ग प्रचारक संघ ने चास स्थित प्रभात कॉलोनी के आनंद मार्ग जागृति में मंगलवार 6 सितंबर को कौशिकी दिवस मनाया गया। इस मौके पर आचार्य रमेंद्रानंद अवधूत ने कौशिकी के विशेषता और इतिहास की चर्चाक करते हुए बताया कि कौशिकी कोश से बना है। मानव मन के पंच कोश होते हैं, इनमें काममय कोश, मनोमय कोश, अतिमानस कोश, विज्ञानमय और हिरणमय कोश है। पांचों कोश के साथ शरीर, मन और आत्मा का विकास जुड़ा हुआ होता है इसीलिए कौशिकी नृत्य करने से भौतिक मानसिक और आध्यात्मिक तीनों स्तर में उन्नति व विकास होता है। कौशिकी में साधकों ने अभ्यास किया। मौके पर आयोजित प्रतियोगिता साधकों ने भाग लिया।

कौशिकी नृत्य के प्रवर्तक श्री श्री आनंदमूर्ति :

मालूम हो कि आनंद मार्ग के प्रवर्तक श्रीश्री आनंदमूर्ति जी ने 6 सितंबर 1978 को कौशिकी नृत्य का प्रवर्तन किया था। कौशिकी नृत्य की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए आचार्य ने कहा कि भगवान श्रीश्री आनंदमूर्ति जी कौशिकी नृत्य के जन्मदाता हैं। यह नृत्य शारीरिक और मानसिक रोगों की औषधि है। विशेषकर महिला जनित रोगों के लिए रामबाण है। महिलाओं के अनियमित ऋतुस्राव जनित त्रुटियां दूर करता है । ब्लाडर और मूत्र नली में के रोगों को दूर करता है। देह के अंग-प्रत्यंगों पर अधिकतर नियंत्रण आता है। मुख मंडल और त्वचा की दीप्ति और सौंदर्य वृद्धि में सहायकहै। कौशिकी नृत्य त्वचा पर परी झुर्रियों को ठीक करता है। आलस्य दूर भगाता है। नींद की कमी के रोग को ठीक करता है। हिस्टीरिया रोग को ठीक करता है। भय की भावना को दूर कर के मन में साहस जगाता है। रीढ में दर्द, अर्श, हर्निया, हाइड्रोसील, स्नायु यंत्रणा और स्नायु दुर्बलता को दूर करता है। 75 से 80 वर्ष की उम्र तक शरीर की कार्य दक्षता को बनाए रखता है।

प्रतिभागी को किया गया पुरस्कृत :

विजेता प्रतिभागी को पुरस्कार देकर पुरस्कृत किया गया। इस मौके पर मुख्य रूप से सरिता देवी, बबीता पाठक, सिंधु देवी, मीनू देवी, लीला देवी, सुपर्णा कुमारी, सृष्टि कुमारी साहित अनेक महिलाओं ने अभ्यास किया l

 

 

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