Ranchi में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने कहा कि कुरमी/कुड़मी जाति समुदाय को आदिवासी बनने को लेकर किया जा रहा आंदोलन आदिवासियों के हक-अधिकारों को हड़पने की मंशा को लेकर है। इनका दावा बिल्कुल निराधार व बेबुनियाद है।

 

न्यूज इंप्रेशन, संवाददाता

Ranchi  : पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने कहा कि कुरमी/कुड़मी जाति समुदाय को आदिवासी बनने को लेकर किया जा रहा आंदोलन आदिवासियों के हक-अधिकारों को हड़पने की मंशा को लेकर है। इनलोगों का आदिवासी बनने का दावा बिल्कुल निराधार व बेबुनियाद है। आदिवासियों के जमीन व जंगल के लंबे संघर्षो में इनकी कोई भूमिका नहीं है।
पूर्व मंत्री आदिवासी समन्वय समिति झारखंड की ओर से रांची धूमकुड़िया भवन, करमटोली में आयोजित संवाददाता सम्मेलन यह बात कही। उन्होंने अधिकार को बचाने के लिए समुदाय को मिलकर संघर्ष करना होगा। पूर्व मंत्री ने कहा कि कुरमी/कुड़मी लोगों का रेल टेका आंदोलन पूरी तरह केन्द्र सरकार व भाजपा की सांठ-गांठ से संचालित है।
कुरमी/कुड़मी जाति कभी आदिवासी नहीं
इस अवसर पर आदिवासी समन्वय समिति के प्रदेश संयोजक लक्ष्मी नारायण मुंडा ने कहा कि कुरमी/कुड़मी जाति समुदाय के संगठनों का आंदोलन आदिवासी समुदाय के राजनीतिक हिस्सेदारी, प्रतिनिधित्व, आरक्षण, जमीन, नौकरी, रोजगार और हक-अधिकारों पर काबिज होने और मूल आदिवासियों को हाशिए में डालने के लिए है। कुरमी/कुड़मी जाति कभी आदिवासी नहीं है। आदिवासी एक रेस है, उस रेस में ये समुदाय कभी नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और भाजपा की भूमिका का पर्दाफाश हो गया है। देश की करोड़ों रुपये राजस्व घाटे में डालने, ट्रेन संचालन को रद्द करके लाखों यात्रियों को परेशानी में डालने जैसी अपराधिक कृत्यों के बावजूद रेल मंत्रालय की चुप्पी इसको साबित कर रही है कि इस खेल में वो भी शामिल हैं। इसलिए आदिवासी समुदाय को इस साज़िश को समझकर इसके खिलाफ खड़ा होना होगा।

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